दिल्ली ब्लास्ट: ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ के तीन Hotspot, डॉक्टरों का ऐसे हुआ ब्रेनवॉश

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया है। जांच में सामने आया है कि इस विस्फोट के पीछे कोई सामान्य आतंकी गिरोह नहीं, बल्कि एक “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” सक्रिय था — यानी ऐसा नेटवर्क, जिसमें शामिल लोग डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और अन्य शिक्षित पेशेवर हैं।

जांच में सामने आए तीन प्रमुख हॉटस्पॉट

1. अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरिदाबाद (हरियाणा)
एनआईए की जांच में यह जगह इस मॉड्यूल का अहम केंद्र बताई गई है। विश्वविद्यालय के कुछ डॉक्टरों और प्रोफेसरों पर आरोप है कि वे सोशल मीडिया और धार्मिक सभाओं के ज़रिए युवाओं को कट्टर विचारधारा की ओर मोड़ रहे थे।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विस्फोटक सामग्री और संदिग्ध दस्तावेज़ जब्त किए हैं।

2. शोपियां, दक्षिण कश्मीर
मामले का मुख्य साजिशकर्ता मौलवी इरफान वागे बताया जा रहा है, जो एक धार्मिक नेता होने के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में भी काम करता था।
इरफान ने अपने संपर्कों के ज़रिए कई मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को जिहादी विचारधारा से प्रभावित किया और उन्हें “धार्मिक कर्तव्य” के नाम पर हिंसा के लिए तैयार किया।

3. यूपी-हरियाणा सीमावर्ती इलाका
फरिदाबाद और लखनऊ में छापों के दौरान पुलिस ने कई डॉक्टरों और छात्रों को हिरासत में लिया है।
इन जगहों से हथियार, लैपटॉप और चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे साफ हुआ कि यह नेटवर्क एक संगठित योजना के तहत दिल्ली ब्लास्ट की साजिश रच रहा था।


🧠 कैसे हुआ डॉक्टरों का ब्रेनवॉश

एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नेटवर्क ने शिक्षित युवाओं को “धार्मिक सेवा” और “मानवता की रक्षा” के नाम पर धीरे-धीरे प्रभावित किया।

  • पहले इन्हें धार्मिक चर्चाओं और वर्चुअल ग्रुप्स में जोड़ा गया।
  • धीरे-धीरे इन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि उनका ज्ञान और कौशल “ईश्वर की राह” में इस्तेमाल होना चाहिए।
  • कुछ डॉक्टरों को फंडिंग, विदेशों से कनेक्शन और सोशल वेलफेयर के झांसे में लाया गया।
  • अंततः इन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित और उपयोग किया गया।

🚨 अब तक की कार्रवाई

  • एनआईए (NIA) ने इस पूरे मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।
  • अब तक 8 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें डॉक्टर और शिक्षक भी शामिल हैं।
  • करीब 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।
  • देशभर के मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में इस नेटवर्क से जुड़ी जांच जारी है।

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